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सरकारी तालाब पर कब्जे की इमारत, प्रशासन की खामोशी दतौली में धड़ल्ले से मिट रही सरकारी जमीन

सरकारी तालाब पर कब्जे की इमारत, प्रशासन की खामोशी दतौली में धड़ल्ले से मिट रही सरकारी जमीन उन्नाव।असोहा ब्लॉक के दतौली गांव में सरकारी तालाब पर हो रहे अवैध निर्माण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के बीचों-बीच स्थित यह मुख्य तालाब, जिसमें पूरे गांव की नालियों का पानी जाता है, आज कब्जेदारों की नजरों में आ गया है और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना बैठा है। ग्रामीणों के अनुसार तालाब की जमीन पर पहले धीरे-धीरे कब्जा किया गया और अब खुलेआम नया निर्माण खड़ा किया जा रहा है। दिनदहाड़े सरकारी भूमि पर दीवारें खड़ी हो रही हैं, लेकिन न तो राजस्व विभाग की नींद खुल रही है और न ही प्रशासन इस अवैध खेल पर लगाम लगाने के लिए आगे आ रहा है। इससे साफ झलकता है कि या तो जिम्मेदारों की नजर इस ओर गई ही नहीं या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो जल्द ही तालाब का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। गांव की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह इसी तालाब पर निर्भर है। तालाब सिकुड़ने का सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में गांव जलभराव और गंदगी की गंभीर समस्या से जूझेगा। लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर कब्जे का यह खेल प्रशासन की लापरवाही और ढीले रवैये के बिना संभव नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब गांव का मुख्य सरकारी तालाब ही सुरक्षित नहीं है, तो बाकी सार्वजनिक जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसके भरोसे है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने और तालाब की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो दतौली का यह ऐतिहासिक तालाब भी अवैध कब्जों की भेंट चढ़ जाएगा।

उन्नाव।असोहा ब्लॉक के दतौली गांव में सरकारी तालाब पर हो रहे अवैध निर्माण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के बीचों-बीच स्थित यह मुख्य तालाब, जिसमें पूरे गांव की नालियों का पानी जाता है, आज कब्जेदारों की नजरों में आ गया है और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना बैठा है।

ग्रामीणों के अनुसार तालाब की जमीन पर पहले धीरे-धीरे कब्जा किया गया और अब खुलेआम नया निर्माण खड़ा किया जा रहा है। दिनदहाड़े सरकारी भूमि पर दीवारें खड़ी हो रही हैं, लेकिन न तो राजस्व विभाग की नींद खुल रही है और न ही प्रशासन इस अवैध खेल पर लगाम लगाने के लिए आगे आ रहा है। इससे साफ झलकता है कि या तो जिम्मेदारों की नजर इस ओर गई ही नहीं या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो जल्द ही तालाब का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। गांव की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह इसी तालाब पर निर्भर है। तालाब सिकुड़ने का सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में गांव जलभराव और गंदगी की गंभीर समस्या से जूझेगा।

लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर कब्जे का यह खेल प्रशासन की लापरवाही और ढीले रवैये के बिना संभव नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब गांव का मुख्य सरकारी तालाब ही सुरक्षित नहीं है, तो बाकी सार्वजनिक जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसके भरोसे है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने और तालाब की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो दतौली का यह ऐतिहासिक तालाब भी अवैध कब्जों की भेंट चढ़ जाएगा।

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